चौमूं में वकीलों का राजस्व पोर्टल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन: ऑनलाइन प्रक्रिया को बताया ‘काला कानून’, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

चौमू। चौमूं में दी बार एसोसिएशन के वकीलों ने राजस्व न्यायालयों में लागू की गई ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने इस प्रक्रिया को कानून के विपरीत बताते हुए ‘काला कानून’ करार दिया और इसे तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने पेन डाउन हड़ताल करते हुए न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। वकीलों का कहना है कि राजस्व मामलों को पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित करना व्यावहारिक नहीं है और इससे न केवल वादकारियों को परेशानी होगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता भी प्रभावित होगी।


एक सप्ताह से हड़ताल पर वकील

दी बार एसोसिएशन चौमूं के अधिवक्ताओं ने बताया कि वे पिछले एक सप्ताह से लगातार हड़ताल पर हैं और राजस्व न्यायालयों में वाद, अपील और अन्य प्रकरणों के ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था को बिना अधिवक्ताओं से विमर्श लागू किया गया, जो न्यायिक परंपराओं के खिलाफ है।


मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

विरोध प्रदर्शन के बाद दी बार एसोसिएशन चौमूं के वकीलों ने उपखंड अधिकारी दिलीप सिंह राठौड़ को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।

वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो वे आने वाले दिनों में न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।


प्रदर्शन में ये अधिवक्ता रहे मौजूद

इस विरोध प्रदर्शन में दी बार एसोसिएशन चौमूं के कई पदाधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल रहे, जिनमें—

  • अध्यक्ष: चरण सिंह जाट

  • महासचिव: मुकेश कुमार अग्रवाल

  • उपाध्यक्ष: पुरुषोत्तम यादव

  • सांस्कृतिक सचिव: प्रियंका यादव

सहित वरिष्ठ अधिवक्ता हेमराज यादव, कालूराम अग्रवाल, पवन कुमार प्रजापति, नानू सिंह शेखावत, ज्ञानेंद्र स्वर्णकार, गिर्राज भदाला, विजय भदाला, राजेंद्र मीणा, केआर यादव और अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।


वकीलों की मुख्य आपत्तियां

  • ऑनलाइन प्रक्रिया से ग्रामीण और अशिक्षित वादकारियों को परेशानी

  • तकनीकी खामियों से न्यायिक कार्य बाधित होने की आशंका

  • परंपरागत न्यायिक प्रणाली के विपरीत व्यवस्था

  • अधिवक्ताओं से परामर्श के बिना निर्णय लागू करना


निष्कर्ष:

चौमूं में वकीलों का यह विरोध प्रदर्शन राजस्व न्यायालयों में ऑनलाइन पोर्टल को लेकर बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। यदि प्रशासन और राज्य सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित होने की आशंका है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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