अमेरिका ने PoK-अक्साई चिन को भारत का हिस्सा बताया: ट्रेड डील के बाद इंडियन मैप शेयर, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

वॉशिंगटन डीसी। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने के बीच एक बड़ा राजनीतिक संकेत सामने आया है। अमेरिका ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाते हुए आधिकारिक इंडियन मैप साझा किया है।

शुक्रवार को भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क की घोषणा की। इसी के साथ अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सोशल मीडिया पर भारत का नक्शा साझा किया, जिसमें पूरा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र भारत के अभिन्न हिस्से के रूप में दर्शाया गया है।

इस नक्शे में न केवल PoK, बल्कि चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन क्षेत्र को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है, जिससे यह मैप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

पहले के अमेरिकी नक्शों से अलग यह मैप

अब तक अमेरिका और कई पश्चिमी देशों के आधिकारिक नक्शों में PoK और अक्साई चिन को विवादित क्षेत्र के रूप में अलग रंग, डॉटेड लाइन या नोट के साथ दिखाया जाता रहा है।

लेकिन इस बार साझा किए गए नक्शे में किसी तरह की डॉटेड लाइन या विवाद का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि ट्रम्प प्रशासन ने जानबूझकर या अनजाने में भारत की संप्रभुता को पूरी तरह स्वीकार करने वाला नक्शा जारी कर दिया है।

भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं, और PoK व अक्साई चिन पर बाहरी कब्जा अवैध है।

PoK विवाद: भारत-पाकिस्तान का पुराना टकराव

PoK को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद 1947 से चला आ रहा है।

1947 में विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत थी। पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सेना कश्मीर पहुंची।

1947-48 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे आज PoK कहा जाता है। 1949 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ और नियंत्रण रेखा (LoC) अस्तित्व में आई।

भारत का स्पष्ट रुख है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, PoK सहित, भारत का हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान इसे आजाद कश्मीर बताता है और UN प्रस्तावों का हवाला देता है।

पाकिस्तान को कड़ा संदेश

अमेरिका द्वारा जारी इस नक्शे को पाकिस्तान के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बयान दिया था कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।

शहबाज शरीफ ने यह भी कहा था कि कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान की विदेश नीति की नींव है और इसका समाधान UN प्रस्तावों के तहत होना चाहिए।

अमेरिका के इस कदम से पाकिस्तान के इन दावों को झटका लगा है।

अक्साई चिन: भारत-चीन विवाद की जड़

अक्साई चिन भारत और चीन के बीच सबसे संवेदनशील सीमा विवादों में से एक है। यह लद्दाख के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है।

भारत इसे लद्दाख का अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि चीन ने 1962 के युद्ध के बाद इस पर कब्जा कर लिया। इस क्षेत्र से चीन ने तिब्बत और शिनजियांग को जोड़ने वाली रणनीतिक सड़क बनाई है।

1962 के युद्ध के बाद से अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण बना हुआ है और वर्तमान में यहां लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) लागू है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का फ्रेमवर्क

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क जारी किया है, जिसके तहत कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।

दोनों देशों ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।

कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के अनुसार, इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक पहुंच मिलेगी। MSME, किसान, मछुआरे, महिलाएं और युवा उद्यमी इसके सबसे बड़े लाभार्थी होंगे।

भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने पर भी सहमति जताई है।

भारत को मिलने वाले प्रमुख फायदे

अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
जेनेरिक दवाओं, रत्न-आभूषण और विमान पार्ट्स पर जीरो टैरिफ लागू होगा।
टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पादों में नए अवसर मिलेंगे।
ऑटो पार्ट्स और विमान कंपोनेंट्स को विशेष छूट दी जाएगी।

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निष्कर्ष:

अमेरिका द्वारा साझा किया गया यह नक्शा केवल एक ग्राफिक नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर एक मजबूत राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। PoK और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाना न केवल पाकिस्तान और चीन के लिए संदेश है, बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर को भी दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस कदम के कूटनीतिक और राजनीतिक असर और स्पष्ट हो सकते हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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