पाक रक्षा मंत्री का सनसनीखेज बयान: “अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर फेंक दिया”, अफगान जंग से आतंक तक कबूली बड़ी गलतियां

इस्लामाबाद |  पाकिस्तान की संसद में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने न सिर्फ पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि दशकों पुराने रणनीतिक गठबंधन की असलियत भी उजागर कर दी।

ख्वाजा आसिफ ने संसद में खुलकर कहा कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकलते ही उसे “टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया।” उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ खड़े होने की जो कीमत पाकिस्तान ने चुकाई, वह आज भी देश को आतंकवाद, अस्थिरता और सामाजिक टूटन के रूप में झेलनी पड़ रही है।


“दो जंग लड़ीं, लेकिन फायदा किसी और का हुआ”

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में दो बड़ी जंगों में हिस्सा लिया, जिन्हें इस्लाम और मजहब के नाम पर जनता को समझाया गया, लेकिन असल सच्चाई कुछ और थी।

ख्वाजा आसिफ ने कहा—

“अफगानिस्तान की इन जंगों में हिस्सा लेना पाकिस्तान की नहीं, बल्कि दो सैन्य तानाशाहों—जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ—की रणनीति थी, जिन्होंने वैश्विक ताकतों का समर्थन पाने के लिए देश को युद्ध में झोंक दिया।”

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इन फैसलों का खामियाजा आम पाकिस्तानी नागरिक आज भी भुगत रहे हैं।


1979 का जिक्र: अमेरिका ने बनाया अपना नरेटिव

ख्वाजा आसिफ ने 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत संघ के हस्तक्षेप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि—

  • सोवियत संघ ने अफगान सरकार के आमंत्रण पर हस्तक्षेप किया था

  • लेकिन अमेरिका ने इसे आक्रमण बताकर वैश्विक स्तर पर अपना नरेटिव तैयार किया

  • उसी नरेटिव के तहत पाकिस्तान को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया

आसिफ के मुताबिक, उस दौर में पाकिस्तान ने बिना दीर्घकालिक परिणामों पर सोचे अमेरिका का साथ दिया, जिसकी कीमत आज तक चुकानी पड़ रही है।


Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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