बांग्लादेश चुनाव में हिंसा की आंच: झड़प में BNP कार्यकर्ता की मौत, बम धमाकों के बीच 33% मतदान

बांग्लादेश: में आम चुनाव के लिए मतदान जारी है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के बीच हिंसा और तनाव की खबरों ने माहौल को गंभीर बना दिया है। खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी समर्थकों के बीच हुई झड़प में बीएनपी नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई। वहीं, मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में मतदान केंद्रों के बाहर देसी बम फेंके जाने की घटनाएं सामने आई हैं। चुनाव आयोग के अनुसार दोपहर तक देशभर के लगभग 33 हजार मतदान केंद्रों पर करीब 33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है।

झड़प में मौत, अलग-अलग दावे

खुलना-2 के आलिया मदरसा मतदान केंद्र पर सुबह करीब साढ़े सात बजे झड़प की घटना हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वोटिंग शुरू होते ही दोनों दलों के समर्थकों के बीच बहस और धक्का-मुक्की हुई। इसी दौरान मोहिबुज्जमान कोच्चि गिर पड़े और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

बीएनपी का आरोप है कि जमात के एक नेता ने उन्हें जोर से धक्का दिया, जिससे वे पेड़ से टकरा गए। दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी के नेताओं का कहना है कि हंगामे के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच में हृदयाघात की आशंका जताई है, हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

मतदान केंद्रों के बाहर धमाके

मुंशीगंज-3 में एक मतदान केंद्र के बाहर 10 से 12 देसी बम फेंके गए, जिससे कुछ समय के लिए मतदान रोकना पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक स्थिति पर जल्द काबू पा लिया गया और करीब 15 मिनट बाद मतदान फिर शुरू कर दिया गया।

गोपालगंज सदर इलाके में भी एक केंद्र के बाहर कॉकटेल बम फेंका गया। इस घटना में दो अंसार जवान और एक 14 वर्षीय लड़की घायल हो गई। घायलों को स्थानीय क्लिनिक में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

कई जिलों में झड़पें

मेहरपुर, बागेरहाट और श्यामनखोला समेत कई इलाकों से भी झड़पों की खबरें आई हैं। मेहरपुर में बीएनपी और जमात समर्थकों के बीच टकराव में नौ लोग घायल हो गए। आरोप है कि कुछ स्थानों पर मतदाताओं को मतदान केंद्र में प्रवेश से रोका गया, जिसके बाद विवाद बढ़ा।

श्यामनखोला में भी छह जमात कार्यकर्ताओं के घायल होने की सूचना है। बीएनपी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पुलिस कार्रवाई और मौत की एक और घटना

किशोरगंज जिले के भैरब में पुलिस की मौजूदगी के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति में 55 वर्षीय रज्जाक मियां की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस ने भीड़ हटाने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसके बाद वे भागते समय गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

चुनावी मुकाबला और बड़े चेहरे

इस बार 51 राजनीतिक दल चुनाव मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है। बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान ने मतदान के बाद चुनाव आयोग से नतीजे जल्द घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देरी से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मतदान निष्पक्ष नहीं हुआ तो परिणाम स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

जमात-ए-इस्लामी ने तीन सीटों—कुमिला-8, शरियतपुर-2 और पटुआखाली-1—पर मतदान स्थगित करने की मांग की है, आरोप लगाते हुए कि वहां गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।

अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने मतदान के बाद इसे “नए बांग्लादेश की शुरुआत” बताया और लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। सेना प्रमुख वकार-उज-जमान ने भी नागरिकों से बिना डर के मतदान करने का आग्रह किया।

अल्पसंख्यकों में चिंता

चुनाव से एक दिन पहले मौलवीबाजार जिले में 28 वर्षीय हिंदू युवक रतन साहुकार का शव मिलने से अल्पसंख्यक समुदाय में चिंता बढ़ गई है। शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं और पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक घटना को चुनाव से सीधे जोड़ने के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं।

महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका

करीब 12.7 करोड़ मतदाता इस चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें लगभग आधे मतदाता 18 से 37 वर्ष आयु वर्ग के हैं और करीब 45 लाख से अधिक मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं। कई केंद्रों पर सुबह से महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं, जिससे संकेत मिलता है कि महिला भागीदारी इस बार उल्लेखनीय है।

299 सीटों पर मतदान

300 सदस्यीय संसद में से 299 सीटों पर मतदान हो रहा है। शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के कारण वहां मतदान स्थगित कर दिया गया है। चुनाव ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ प्रणाली के तहत हो रहा है।


निष्कर्ष:

बांग्लादेश का आम चुनाव इस बार उत्साह और तनाव दोनों का मिश्रण नजर आ रहा है। एक ओर बड़ी संख्या में युवा और महिला मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर झड़पों, धमाकों और मौत की घटनाओं ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। 33 प्रतिशत मतदान के साथ मुकाबला कड़ा दिख रहा है और आने वाले घंटों में सुरक्षा और पारदर्शिता सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी। अब निगाहें चुनाव आयोग और अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो देश की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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