पूजा या नमाज? भोजशाला पर टकराव तेज, बसंत पंचमी से पहले सत्याग्रह, अब सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

धार (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश का धार जिला एक बार फिर भोजशाला विवाद को लेकर सुर्खियों में है। वजह है बसंत पंचमी 2026, जो इस बार 23 जनवरी को शुक्रवार के दिन पड़ रही है। एक ओर हिंदू समाज बसंत पंचमी पर भोजशाला में पूरे दिन मां सरस्वती की पूजा की अनुमति चाहता है, वहीं मुस्लिम समाज शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा करने की मांग कर रहा है। इसी टकराव के चलते माहौल संवेदनशील हो गया है और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

भोजशाला में तेज हुआ सत्याग्रह

बसंत पंचमी से पहले भोजशाला परिसर में नियमित सत्याग्रह जारी है। मंगलवार को बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग सत्याग्रह में शामिल हुए। भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी का चित्र स्थापित किया गया, हनुमान चालीसा का पाठ हुआ और बसंत पंचमी के दिन अखंड पूजा करने का संकल्प लिया गया। इस दौरान महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। सत्याग्रह में जिला भाजपा अध्यक्ष निलेश भारती और पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष राजीव यादव भी शामिल रहे।

“क्या भोजशाला के लिए न्यायालय के पास समय नहीं?”

सत्याग्रह में शामिल हुए प्रसिद्ध कवि पंडित संदीप शर्मा ने कहा कि धार में वास्तविक तनाव नहीं है, बल्कि भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले 50 वर्षों से भोजशाला का मामला लटका हुआ है। उनका कहना था कि जब किसी आतंकी के मामले में आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुल सकता है, तो फिर भोजशाला जैसे आस्था से जुड़े विषय पर फैसला क्यों नहीं हो सकता।

प्रशासन अलर्ट, दोनों पक्षों से बातचीत

पूरे मामले को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। भोजशाला परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें भी की हैं। मुस्लिम पक्ष ने शुक्रवार को सांकेतिक जुमे की नमाज की बात कही है, जिसमें सीमित संख्या में लोग शामिल हों। वहीं हिंदू पक्ष बसंत पंचमी पर केवल पूजा की अनुमति देने की मांग पर अड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सुनवाई

इस संवेदनशील विवाद पर अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले की सुनवाई 22 जनवरी को तय की है। माना जा रहा है कि कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो सकेगा कि 23 जनवरी को भोजशाला में पूजा होगी या नमाज, या फिर कोई मध्य रास्ता निकाला जाएगा।


निष्कर्ष:

बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने से भोजशाला विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया है। सत्याग्रह, प्रशासनिक सतर्कता और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब 22 जनवरी को आने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही तय करेगा कि 23 जनवरी को धार की भोजशाला में पूजा होगी या नमाज, या फिर दोनों पक्षों के लिए कोई संतुलित व्यवस्था बनाई जाएगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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