भारत में इंटरनेशनल साजिश का खुलासा: NIA ने US नागरिक समेत 7 विदेशी पकड़े, म्यांमार कनेक्शन से हड़कंप

भारत: की सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) ने एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश करते हुए अमेरिकी नागरिक समेत 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

NIA ने 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता में एक साथ कार्रवाई करते हुए इन आरोपियों को पकड़ा। गिरफ्तार लोगों में एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी भारत के नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों को समर्थन देने और म्यांमार के सशस्त्र समूहों तक हथियार व ट्रेनिंग पहुंचाने की साजिश में शामिल थे।

गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक की पहचान मैथ्यू एरॉन वैन डाइक के रूप में हुई है, जो पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शामिल रह चुका है। बताया जा रहा है कि वह 2011 के लीबिया गृह युद्ध और सीरिया गृह युद्ध में विदेशी लड़ाके के तौर पर हिस्सा ले चुका है। इसके अलावा, उसने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेनी युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण भी दिया था।

NIA के मुताबिक, यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोप है कि ये लोग यूरोप से ड्रोन मंगाकर उनका इस्तेमाल म्यांमार के विद्रोही संगठनों को ट्रेनिंग देने और हथियारों की सप्लाई में करने की योजना बना रहे थे। इन ड्रोन के जरिए निगरानी, हमले और तकनीकी सहायता प्रदान करने की तैयारी थी।

गिरफ्तार यूक्रेनी नागरिकों में हुर्बा पेट्रो, तारास स्लीव्याक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ आतंकवादी साजिश रचने (धारा 18) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच एजेंसी ने कोर्ट में दावा किया कि आरोपी AK-47 जैसे हथियार रखने वाले संदिग्ध आतंकवादियों के सीधे संपर्क में थे और प्रतिबंधित भारतीय उग्रवादी संगठनों को ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे थे। इसके अलावा, वे म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों के साथ मिलकर काम कर रहे थे।

इस मामले में NIA के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सभी आरोपियों को 11 दिन की हिरासत में भेज दिया है, ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके। एजेंसी ने 15 दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने 11 दिन की अनुमति दी।

इस गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। यूक्रेन ने भारत सरकार के सामने आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है और अपने नागरिकों की रिहाई की मांग की है। यूक्रेन के राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर इस मुद्दे पर आपत्ति जताई।

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत ने उनके दूतावास को इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक सूचना नहीं दी, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उनके नागरिक गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थे।

वहीं, अमेरिकी दूतावास ने भी इस मामले पर नजर बनाए रखने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। खासकर म्यांमार में चल रहे संघर्ष और वहां सक्रिय सशस्त्र समूहों के साथ इस नेटवर्क के संबंध भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

फिलहाल, NIA इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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