मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चैत्र नवरात्र स्थापना पर पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की

जयपुर: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित राजराजेश्वरी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर घट स्थापना की। इस धार्मिक अनुष्ठान में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ पारंपरिक विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

नवरात्रि का पहला दिन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है और भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास, साधना और भक्ति में लीन रहते हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने भी विधिपूर्वक पूजा कर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।

राजराजेश्वरी मंदिर में हुआ विशेष अनुष्ठान

मुख्यमंत्री निवास स्थित राजराजेश्वरी मंदिर में सुबह से ही धार्मिक माहौल देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच घट स्थापना की गई और मां दुर्गा की आरती उतारी गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूरे विधि-विधान से पूजा करते हुए प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद मांगा।

उन्होंने कहा कि नवरात्रि आत्मशुद्धि, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है, जो समाज में नई ऊर्जा का संचार करता है।

प्रदेश की खुशहाली के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना

पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी और समृद्ध जीवन की कामना की। उन्होंने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि राज्य में शांति बनी रहे और विकास के सभी कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ते रहें।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल विकास कार्य करना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को उसका लाभ पहुंचाना है, ताकि हर व्यक्ति खुशहाल जीवन जी सके।

पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश

पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक अनूठी पहल करते हुए वृक्षों पर पक्षियों के लिए ‘परिंदे’ भी बांधे। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया, ताकि पक्षियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देती है, बल्कि समाज को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा भी देती है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे भी अपने घरों और आस-पास के क्षेत्रों में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके।

नवरात्रि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है। यह पर्व शक्ति की आराधना का प्रतीक है, जिसमें भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इन नौ दिनों में उपवास, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है।

राजस्थान समेत पूरे देश में नवरात्रि का पर्व बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

आध्यात्मिकता और सामाजिक संदेश का संगम

मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। परिंदे बांधने जैसी पहल से उन्होंने यह दिखाया कि शासन और समाज दोनों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

जनभागीदारी की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे नवरात्रि के इस पावन अवसर पर न केवल पूजा-अर्चना करें, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा की गई पूजा-अर्चना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश यह दर्शाता है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। परिंदे बांधने जैसी पहल ने इस आयोजन को खास बना दिया और लोगों को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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