नाथद्वारा में 131 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा का लोकार्पण, 30 किलोमीटर दूर से दिखाई देगी

राजस्थान: के राजसमंद जिले के नाथद्वारा में रामनवमी के अवसर पर आस्था और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां गिरिराज पर्वत पर स्थापित 131 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा का विधि-विधान से लोकार्पण किया गया।

यह प्रतिमा न सिर्फ राजस्थान की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा है, बल्कि अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के कारण पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गई है।

गिरिराज पर्वत पर भव्य स्थापना

नाथद्वारा में स्थित गिरिराज पर्वत पर करीब 500 फीट की ऊंचाई पर इस प्रतिमा का निर्माण किया गया है।

प्रतिमा ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ के नाम से जानी जाएगी और इसे विश्व की विशाल शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ के सामने स्थापित किया गया है।

लोकार्पण समारोह सुबह 9 बजे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

30 किलोमीटर दूर से दिखेगी प्रतिमा

करीब 131 फीट ऊंची यह प्रतिमा इतनी विशाल है कि इसे लगभग 30 किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है।

इसकी ऊंचाई 13 मंजिला इमारत के बराबर बताई जा रही है, जो इसे देश की चौथी सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा बनाती है।

सोने जैसी चमक, थाइलैंड से मंगवाया गया रंग

प्रतिमा की खासियत इसकी स्वर्णिम आभा भी है।

इसकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहे, इसके लिए विशेष गोल्डन कलर थाइलैंड से मंगवाया गया।

करीब 150 टन वजनी इस प्रतिमा को आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है।

निर्माण के दौरान 3 साल तक चला सुंदरकांड

इस प्रतिमा के निर्माण के दौरान लगातार धार्मिक अनुष्ठान भी किए गए।

करीब तीन साल तक रोजाना सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, ताकि निर्माण कार्य निर्विघ्न पूरा हो सके।

यह पहल इस परियोजना को धार्मिक आस्था से जोड़ती है।

विशेष दिशा में बनाई गई प्रतिमा

हनुमानजी की यह प्रतिमा दक्षिणमुखी है और प्रणाम मुद्रा में बनाई गई है।

इसका मुख प्रभु श्रीनाथजी और शिव प्रतिमा की ओर रखा गया है, जो स्वामी भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा को रक्षक और फलदायी माना जाता है।

निर्माण में आई तकनीकी चुनौतियां

इस प्रतिमा का निर्माण आसान नहीं था।

मूर्तिकार नरेश कुमावत के अनुसार, पहाड़ी पर तेज हवा के कारण क्रेन को स्थिर रखना भी मुश्किल था।

हर समय हादसे का खतरा बना रहता था, लेकिन आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना के जरिए इसे सफलतापूर्वक तैयार किया गया।

अनुभवी मूर्तिकार ने तैयार की प्रतिमा

प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत ने किया है, जो देश-विदेश में 6 हजार से अधिक मूर्तियां बना चुके हैं।

उनकी बनाई मूर्तियां भारत के कई प्रमुख स्थलों के अलावा विदेशों में भी स्थापित हैं।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस भव्य प्रतिमा के निर्माण से नाथद्वारा में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय लोगों और प्रशासन का मानना है कि यह स्थल आने वाले समय में आस्था का बड़ा केंद्र बनेगा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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