जोधपुर में 21 हजार की चांदी की पिचकारी! इस होली ठाकुरजी पर उड़ेगा रॉयल गुलाल

जोधपुर। फाल्गुन की मस्ती और रंगों की बौछार के बीच इस बार जोधपुर के बाजारों में कुछ खास नजर आ रहा है। रंग-बिरंगी प्लास्टिक पिचकारियों के बीच एक अनोखी चमक लोगों का ध्यान खींच रही है—चांदी की पिचकारियां, जिनकी कीमत 21 हजार रुपए तक है। खास बात यह है कि ये पिचकारियां आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि ठाकुरजी के लिए तैयार की गई हैं।

शहर के प्रमुख बाजारों में होली की रौनक चरम पर है। घंटाघर से लेकर सर्राफा बाजार तक दुकानें रंगों, गुलाल और पिचकारियों से सजी हुई हैं। ‘फागुन के उमड़घुमड़ बादल’ और ‘रंग दे दो रे’ जैसे भजनों की धुन पर बाजारों में उत्सव जैसा माहौल है।

ठाकुरजी के लिए खास तैयारी

जोधपुर के सरदारपुरा स्थित ज्वेलरी बाजार में इस बार विशेष रूप से ठाकुरजी के लिए चांदी की पिचकारियां और रंग-भरी बाल्टियां तैयार की गई हैं। ज्वेलर घनश्याम सर्राफ के अनुसार, भक्तों की विशेष मांग पर इन पिचकारियों को डिजाइन किया गया है। प्रत्येक पिचकारी की कीमत लगभग 21 हजार रुपए रखी गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल भी सोने-चांदी के होली सामान की बिक्री हुई थी, लेकिन इस बार मांग दोगुनी हो गई है। लोग धार्मिक भाव से होली मनाना पसंद कर रहे हैं और मंदिरों में ठाकुरजी को चांदी की पिचकारी चढ़ाकर रंगोत्सव की शुरुआत कर रहे हैं।

कोलकाता के कारीगरों की खास कारीगरी

इन पिचकारियों को कोलकाता के अनुभवी कारीगरों से स्पेशल ऑर्डर पर बनवाया गया है। महीन नक्काशी और पारंपरिक डिज़ाइन के साथ तैयार इन पिचकारियों में राजस्थानी शिल्प की झलक भी देखने को मिलती है।

सर्राफा बाजार के व्यापारी अमरपाल सिंह झाबरा का कहना है कि होली के मौके पर धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए ठाकुरजी को पहले रंग अर्पित किया जाता है, फिर भक्त खुद रंग खेलते हैं। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए चांदी के गुलाल डिब्बे भी तैयार किए गए हैं, जिनकी कीमत 2 हजार रुपए से शुरू होती है।

बाजार में बढ़ी रौनक

होली के करीब आते ही जोधपुर के बाजारों में खरीदारी तेज हो गई है। बच्चों के लिए कार्टून थीम वाली पिचकारियां, युवाओं के लिए हाई-प्रेशर वाटर गन और पारंपरिक पीतल व चांदी की पिचकारियां—हर तरह के विकल्प उपलब्ध हैं।

लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा चांदी की पिचकारियों को लेकर है। कई मंदिरों और भक्त परिवारों ने पहले ही इनका ऑर्डर बुक करा लिया है। सरदारपुरा और सर्राफा बाजार में इनकी प्रदर्शनी जैसी स्थिति बनी हुई है, जहां लोग इन्हें देखने और खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

राजस्थान में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का भी प्रतीक है। कई मंदिरों में ठाकुरजी को पहले गुलाल अर्पित कर होली खेली जाती है। चांदी की पिचकारी और डिब्बियों से रंग उड़ाना समृद्धि और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

जोधपुर के मंदिरों में हर साल विशेष फाग उत्सव आयोजित होता है, जहां ठाकुरजी के साथ भक्त रंग और अबीर-गुलाल से होली खेलते हैं। इस बार चांदी की पिचकारी इस उत्सव में रॉयल अंदाज जोड़ रही है।

बढ़ती मांग, बढ़ता उत्साह

व्यापारियों के अनुसार, इस बार होली से पहले ही बाजार में 30-40 प्रतिशत अधिक बिक्री दर्ज की गई है। खासकर धार्मिक परिवारों और मंदिर ट्रस्टों से चांदी के होली सामान की मांग बढ़ी है।

लोगों का कहना है कि यह केवल दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा की अभिव्यक्ति है। ठाकुरजी के लिए सर्वोत्तम और पवित्र वस्तु चढ़ाने की भावना से ये विशेष पिचकारियां खरीदी जा रही हैं।


निष्कर्ष:

जोधपुर में इस बार होली का रंग कुछ खास है। 21 हजार रुपए की चांदी की पिचकारी से ठाकुरजी के साथ होली खेलने की परंपरा ने बाजार को नई चमक दी है। कोलकाता के कारीगरों की बारीक कारीगरी और भक्तों की आस्था ने इस फाल्गुन को और भी खास बना दिया है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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