जोधपुर सेंट्रल जेल का जेलर सस्पेंड! नए कैदियों को नियम तोड़कर भेजा दूसरे वार्ड में, जांच शुरू

जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर से प्रशासनिक कार्रवाई का एक बड़ा मामला सामने आया है। जोधपुर सेंट्रल जेल के जेलर हडवंत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कैदियों की वार्ड व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते की गई है। जेल विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी है।

निलंबन आदेश के अनुसार, जांच पूरी होने तक हडवंत सिंह का मुख्यालय भरतपुर के केन्द्रीय कारागृह में रहेगा। इस दौरान उन्हें वहीं उपस्थित रहकर विभागीय नियमों का पालन करना होगा।


नए कैदियों को दूसरे वार्ड में भेजने का आरोप

मामले की जानकारी के अनुसार, जेलर हडवंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जेल में नए आने वाले कैदियों की निर्धारित प्राथमिकता और नियमों को दरकिनार कर उन्हें अन्य वार्डों में भेज दिया। जेल प्रशासन में कैदियों की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए वार्डों का आवंटन विशेष नियमों के तहत किया जाता है।

जेल विभाग के अनुसार इन नियमों का पालन न किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी के आधार पर मामले की प्रारंभिक जांच की गई, जिसके बाद विभाग ने औपचारिक विभागीय जांच प्रस्तावित की है।


अतिरिक्त महानिदेशक जेल ने जारी किया आदेश

इस संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक (जेल) पी. रामजी की ओर से आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हडवंत सिंह के खिलाफ नई कैदियों की वार्ड प्राथमिकता को नजरअंदाज करने के आरोपों की जांच की जाएगी।

जेल विभाग ने यह कार्रवाई राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-13 के तहत की है। इस नियम के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को जांच लंबित रहने के दौरान निलंबित किया जा सकता है।

आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित रखा जाएगा और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।


निलंबन के दौरान भरतपुर में रहेगा मुख्यालय

जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में हडवंत सिंह का मुख्यालय केन्द्रीय कारागृह भरतपुर रहेगा। इसका मतलब है कि उन्हें वहीं रहकर विभागीय प्रक्रिया का पालन करना होगा और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

निलंबन के दौरान उन्हें नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) भी दिया जाएगा, जैसा कि सरकारी सेवा नियमों में प्रावधान है।


स्थानीय अधिकारियों ने जताई अनभिज्ञता

इस पूरे मामले को लेकर जब जोधपुर सेंट्रल जेल के स्थानीय अधिकारियों से जानकारी ली गई तो उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर अनभिज्ञता जताई।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि निलंबन का आदेश सीधे जयपुर स्थित उच्च अधिकारियों द्वारा जारी किया गया है, इसलिए उन्हें मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है।

एक अधिकारी ने बताया कि विभागीय जांच का फैसला उच्च स्तर पर लिया गया है और आगे की प्रक्रिया भी वहीं से तय होगी।


जेल प्रशासन में मचा हड़कंप

जेलर के निलंबन की खबर सामने आने के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जेल में कैदियों की वार्ड व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है क्योंकि इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

यदि वार्ड आवंटन में नियमों का उल्लंघन होता है तो इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।


जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई

जेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यह प्रारंभिक कार्रवाई है। जांच समिति पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी और संबंधित दस्तावेजों, रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी। उसी के आधार पर यह तय किया जाएगा कि जेलर हडवंत सिंह के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष

जोधपुर सेंट्रल जेल के जेलर के निलंबन ने जेल प्रशासन में अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नए कैदियों को नियमों के विपरीत अन्य वार्ड में भेजने के आरोपों की जांच अब विभागीय स्तर पर की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोप कितने सही हैं और दोषी पाए जाने पर आगे क्या कार्रवाई होगी।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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