176 दिन से धरने पर बैठे ग्रामीण: कुतकपुर की चरागाह भूमि पर 220 केवी जीएसएस का विरोध, विधायक के गेट पर आंदोलन की चेतावनी

दौसा: जिले के महवा उपखंड में स्थित कुतकपुर गांव में चरागाह भूमि पर 220 केवी ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) के निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार जारी है। ग्रामीण पिछले 176 दिनों से धरना देकर इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। रविवार को भी गांव के चामुंडा माता मंदिर परिसर में दर्जनों लोग धरने पर बैठे रहे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।

यह विरोध Kutakpur गांव में प्रस्तावित 220 केवी जीएसएस के निर्माण को लेकर हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर यह परियोजना बनाई जा रही है, वह गांव की चरागाह भूमि है और वहां बिजली स्टेशन बनाना उचित नहीं है।


176 दिन से जारी है धरना

ग्रामीणों के अनुसार यह आंदोलन पिछले करीब छह महीने से लगातार चल रहा है।

धरनास्थल Chamunda Mata Temple परिसर में ग्रामीण प्रतिदिन एकत्रित होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

धरने में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को अपनी समस्या से अवगत कराया, लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


चरागाह भूमि पर जीएसएस बनाने का विरोध

धरने में शामिल ग्रामीण नेता Gajraj Gurjar ने बताया कि मूल रूप से 220 केवी जीएसएस का प्रस्ताव Matasuda Khora क्षेत्र के लिए था।

लेकिन अब इस परियोजना को कुतकपुर की चरागाह भूमि पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि चरागाह भूमि गांव के पशुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है और वहां किसी तरह का निर्माण होने से पशुपालकों को भारी नुकसान होगा।


कई बार किए गए पंचायत और मार्च

ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अब तक कई बार पंचायतें आयोजित की जा चुकी हैं।

इसके अलावा गांव के लोगों ने पैदल मार्च भी निकाले और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।

लेकिन इसके बावजूद अभी तक प्रशासन या सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।


विधायक के गेट पर प्रदर्शन की चेतावनी

अब आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे क्षेत्र के विधायक के जनसुनवाई केंद्र के गेट पर प्रदर्शन करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


ग्रामीणों में बढ़ रही नाराजगी

लगातार 176 दिनों से चल रहे धरने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जरूरतों और भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

उनका कहना है कि यदि जीएसएस किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बनाया जाए तो गांव की चरागाह भूमि भी सुरक्षित रहेगी और बिजली परियोजना भी पूरी हो सकेगी।


प्रशासन से समाधान की उम्मीद

धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करे और कोई ऐसा समाधान निकाले जिससे गांव के लोगों की समस्या भी हल हो सके।

ग्रामीणों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं और प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहे हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
अर्नब चक्रवात का असर: राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, उत्तराखंड में बर्फबारी; ओडिशा में बाढ़-भूस्खलन से 3 की मौत | खाटूश्याम बाबा के दर्शन साढ़े 19 घंटे रहेंगे बंद, दीपावली पर मंदिर में होगी साफ-सफाई; जानें नया शेड्यूल | राजस्थान पंचायत चुनाव परिणाम: नीमकाथाना की 39 ग्राम पंचायतों में सरपंचों के नतीजे घोषित, सिरोही में सबसे बड़ी जीत | सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, बोले- 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य | सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर जयपुर में ‘रन फॉर यूनिटी’, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिलाई एकता की शपथ | चक्रवात अर्नब की ताजा अपडेट: कमजोर पड़ा चक्रवात अर्नब, राजस्थान से बिहार तक मौसम का अलर्ट; अंडमान सागर में नया सिस्टम सक्रिय | चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 6 राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ाई, जानिए नई तारीखें | RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस की जीत से BJP को झटका, पुणे में भी हारी; जानिए कहां बिगड़ा चुनावी गणित | भूटान में ग्लेशियर झील फटी, गासा का मशहूर गर्म पानी का कुंड बहा; भारत में बाढ़ का खतरा, बंगाल में 10 हजार लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए | मोदी नहीं, 'ओदी' कहिए... ज्ञानेश कुमार का नाम भी बदला, CJP नेता आशुतोष रांका ने समर्थकों को सिखाई कोड लैंग्वेज |