राजस्थान पंचायत चुनाव पर संशय: हाईकोर्ट की समयसीमा के बीच पंचायतों की रिपोर्ट ने खोली जमीनी हकीकत

राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार ने कुछ प्रशासनिक और अन्य कारणों का हवाला देते हुए इस समयसीमा को व्यावहारिक नहीं माना है। ऐसे में अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

इसी बीच 24 अप्रैल को पंचायतीराज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंचायतों को मजबूत, आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जब तक ग्राम पंचायतें सशक्त नहीं होंगी, तब तक पंचायतीराज व्यवस्था का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकेगा।

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद पंचायतीराज मंत्रालय ने पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) 2.0 जारी किया है। इस रिपोर्ट में 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को 9 प्रमुख विषयों में विभाजित कर पंचायतों का मूल्यांकन किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की पंचायतें सामाजिक न्याय और सुरक्षा के मामले में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन महिला और बाल कल्याण के क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार सामाजिक न्याय और सुरक्षा में लगभग 90 प्रतिशत पंचायतें फ्रंट रनर (A) या परफॉर्मर (B) श्रेणी में शामिल हैं।

वहीं महिला अनुकूल पंचायतों में 73.5 प्रतिशत और बाल अनुकूल पंचायतों में लगभग 65 प्रतिशत पंचायतें एस्पायरेंट (C) श्रेणी में हैं, जो दर्शाता है कि इस क्षेत्र में अभी काफी सुधार की आवश्यकता है।

राज्य में कुल 5389 पंचायतें C श्रेणी, 5437 पंचायतें B श्रेणी तथा 203 पंचायतें D श्रेणी में शामिल की गई हैं। सभी 9 मानकों पर केवल 8 पंचायतें ही पूरी तरह सफल साबित हुई हैं।

इस रिपोर्ट ने पंचायतों की वास्तविक स्थिति और विकास के अंतर को उजागर किया है। अब पंचायत चुनावों के साथ-साथ पंचायतों के समग्र विकास पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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