उदयपुर: हाईकोर्ट ने 2014-15 के बिना नीलामी जारी खनन लाइसेंस मामले में सिंगल बेंच का आदेश पलटा

उदयपुर। जोधपुर हाईकोर्ट की मुख्य पीठ ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए खनन मामलों में वर्ष 2014-15 के दौरान बिना नीलामी जारी किए गए 500 से अधिक प्रोस्पेक्टिंग लाइसेंस (पीएल) और लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) को निरस्त करने संबंधी सिंगल बेंच के आदेश को पलट दिया। उस समय सरकार ने एलओआई और पीएल जारी करने के बाद खदानों की लीज देने से इनकार कर दिया था। प्रभावित पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था।

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की ओर से दायर 118 विशेष अपीलों की एक साथ सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत व्यावसायिक हितों से ऊपर जनहित और प्राकृतिक संसाधनों की पारदर्शी नीलामी सर्वोपरि है। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर बिश्नोई ने पैरवी की।

मामला वर्ष 2014-15 का है। उस समय राजस्थान सरकार ने पहले आओ-पहले पाओ की नीति के तहत 500 से अधिक पीएल और एलओआई जारी किए थे। शिकायतों और पारदर्शिता की कमी के कारण अक्टूबर 2015 में राज्य सरकार ने सभी आवंटनों को एक साथ रद्द कर दिया था। निजी खदान मालिक और कंपनियों ने सिंगल बेंच में चुनौती दी और राहत पाई थी। राज्य सरकार ने इस फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पलटा।

पीएल और एलओआई की जानकारी:

  • पीएल (Prospecting License): जमीन के नीचे खनिजों की खोज, जांच और सैंपलिंग करने के लिए दिया जाने वाला प्रारंभिक सरकारी लाइसेंस।
  • एलओआई (Letter of Intent): खनन का स्थायी अधिकार देने से पहले सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला सशर्त स्वीकृति पत्र।

अदालत के तीन मुख्य कानूनी बिंदु:

  1. 2021 का कानून संशोधन: पुराने गैर-नीलामी वाले मामले, जिनमें अंतिम लीज डीड पंजीकृत नहीं हुई, अब कानूनन स्वतः समाप्त माने जाएंगे।
  2. एलओआई मिलने से मालिकाना हक नहीं: प्रारंभिक मंशा पत्र जारी होने से किसी को स्थायी कानूनी अधिकार नहीं मिलता।
  3. नीलामी ही पारदर्शी रास्ता: प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन केवल प्रतिस्पर्धी नीलामी के जरिए होना चाहिए।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद विवादित खनिज ब्लॉकों को नए सिरे से पारदर्शी नीलामी में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे राज्य के खजाने में हजारों करोड़ रुपए के राजस्व की संभावना बढ़ गई है। न्यायालय ने उन पीएल धारकों को राहत दी है, जिन्होंने वास्तविक खोज कार्य में खर्च किया था और वे नियमों के तहत प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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