पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली लूणी नदी के बहाव क्षेत्र में सड़क निर्माण का मामला अब कानूनी विवाद में बदल गया है। बालोतरा जिले में छत्रियों का मोर्चा से मेगा हाईवे तक बनाए गए लिंक रोड को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राजस्व रिकॉर्ड में “गैर मुमकिन नदी” दर्ज भूमि पर सड़क निर्माण कानूनन उचित नहीं माना जा सकता।
यह मामला प्रदूषण निवारण एवं पर्यावरण संरक्षण समिति की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि मास्टर प्लान से हटकर सड़क का निर्माण सीधे लूणी नदी के बहाव क्षेत्र और तलहटी में किया गया है। कोर्ट के समक्ष जिला कलक्टर बालोतरा और तहसीलदार पचपदरा की संयुक्त रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें सीमांकन के आधार पर यह पुष्टि हुई कि सड़क निर्माण नदी क्षेत्र में किया गया है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि राजस्थान की अधिकांश नदियां वर्ष के अधिकतर समय सूखी रहती हैं, लेकिन उनका कानूनी और पर्यावरणीय स्वरूप समाप्त नहीं होता। सूखी नदी भी नदी ही होती है और उसका बहाव क्षेत्र जल निकासी, भूजल पुनर्भरण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अदालत ने लूणी नदी के प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए यदि नदी क्षेत्र से मार्ग निकालना आवश्यक हो तो पुल, एलिवेटेड कॉरिडोर या खंभों पर आधारित संरचनाओं जैसे इंजीनियरिंग विकल्प अपनाए जाने चाहिए। अदालत ने कहा कि ‘गैर मुमकिन नदी’ भूमि केवल खाली सरकारी जमीन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जिसका संरक्षण राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में विस्तृत शपथ-पत्र और तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें वैकल्पिक निर्माण विकल्पों का उल्लेख भी शामिल होगा। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। अब इस पूरे मामले में राज्य सरकार की रिपोर्ट और आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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