नाचना क्षेत्र में मूंगफली की खेती बनी किसानों की किस्मत बदलने वाली फसल, आय में बढ़ोतरी

इंदिरा गांधी नहर से सिंचित नाचना क्षेत्र, जो कभी बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार जैसी परंपरागत खरीफ फसलों के लिए जाना जाता था, अब मूंगफली उत्पादन का उभरता हुआ प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। पिछले लगभग आठ वर्षों से लगातार मिल रही बेहतर पैदावार ने किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और कृषि पैटर्न में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अनुकूल जलवायु, नहरी सिंचाई और बेहतर उत्पादन के चलते अब आसपास के गांवों के किसान भी मूंगफली की खेती को प्राथमिकता देने लगे हैं।

पहले जहां यह फसल सीमित क्षेत्र में होती थी, वहीं अब इसके सफल परिणामों के कारण इसका रकबा लगातार बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो नाचना क्षेत्र आने वाले वर्षों में पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख मूंगफली उत्पादक इलाकों में शामिल हो सकता है। किसानों के अनुसार एक बीघा भूमि में औसतन 8 से 10 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है, जिससे लागत के मुकाबले बेहतर मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

किसानों का कहना है कि मूंगफली की सफलता का सबसे बड़ा कारण समय पर मिलने वाला नहरी पानी और अनुकूल मौसम है। खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य खर्चों के बाद भी यह फसल बेहतर आर्थिक लाभ दे रही है। इस वर्ष भी समय पर सिंचाई मिलने से अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि किसानों ने यह भी मांग की है कि सहकारी समितियों द्वारा एमएसपी पर खरीद की सीमा बढ़ाई जाए। वर्तमान में प्रति किसान 40 क्विंटल की सीमा होने के कारण उन्हें पूरा लाभ नहीं मिल पाता। यदि यह सीमा 80 क्विंटल की जाए तो किसानों की आय में और वृद्धि संभव है। लगातार बढ़ता रकबा और बेहतर उत्पादन इस बात का संकेत है कि नाचना क्षेत्र मूंगफली उत्पादन का नया हब बनता जा रहा है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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