विद्यालयों में बाहरी हस्तक्षेप और शिक्षकों के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध, सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील

जयपुर। राजकीय विद्यालयों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), जयपुर संभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि राजकीय विद्यालयों को किसी भी कीमत पर राजनीतिक गतिविधियों, विवाद और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा।

महासंघ के प्रदेश संगठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने हाल ही में सामने आई एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि एक राजकीय विद्यालय में सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा निरीक्षण के प्रयास का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कथित गाली-गलौज एवं मारपीट की स्थिति बनने की जानकारी सामने आई। महासंघ ने घटना में हुई हिंसा और मारपीट की निंदा करते हुए कहा कि विद्यालय से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान शिक्षा विभाग और प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए।

शिक्षकों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की मांग

महासंघ के अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग विद्यालयों में संसाधन, शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों को किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या गतिविधि का हिस्सा बनाया जाना शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं। विद्यालयों में शिक्षकों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वातावरण मिलना जरूरी है, ताकि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

बाहरी हस्तक्षेप रोकने के निर्देशों का समर्थन

संभाग उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह जाट ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा विद्यालयों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्था प्रधान की अनुमति लेकर ही विद्यालय में प्रवेश किया जाना चाहिए।

प्रदेश संगठन मंत्री देवेंद्र शर्मा ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, निरीक्षण या शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील

महासंघ ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से शांति बनाए रखने की अपील की है। महासंघ ने कहा कि विद्यालयों से संबंधित किसी भी विवाद का समाधान कानून, शिक्षा विभाग और प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

महासंघ ने कहा कि राजकीय विद्यालय शिक्षा के केंद्र हैं और इन्हें राजनीतिक संघर्ष का मंच बनने से रोकना सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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