जयपुर: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में सदस्य के रूप में कर्नल केसरी सिंह की नियुक्ति अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा है और नियुक्ति से जुड़ी पूरी चयन प्रक्रिया का रिकॉर्ड अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति मनीष शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि जब नियुक्ति आदेश में स्पष्ट रूप से “नियुक्ति” का उल्लेख है, तो इसके लिए कौन-सी विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई गई? साथ ही अदालत ने यह भी जानना चाहा कि चयन का आधार क्या था और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की गई।
याचिका में क्या कहा गया?
सोसाइटी फॉर पब्लिक ग्रीवांसेज और सुभाष सिहाग की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि 9 अक्टूबर 2023 को संविधान के अनुच्छेद 316(1) के तहत कर्नल केसरी सिंह की नियुक्ति बिना किसी पारदर्शी चयन प्रक्रिया और प्रभावी परामर्श के कर दी गई।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि कर्नल केसरी सिंह के कुछ पुराने सार्वजनिक बयान, विशेष रूप से ओबीसी और जाट समुदाय को लेकर, विवादों में रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में नियुक्ति की निष्पक्षता और संवैधानिक उपयुक्तता की भी जांच होनी चाहिए।
सरकार को पेश करने होंगे सभी दस्तावेज
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज, फाइल नोटिंग और चयन का आधार अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। अगली सुनवाई में इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर यह तय होगा कि RPSC सदस्य की यह नियुक्ति संविधान और कानून के अनुरूप हुई या नहीं।
इस मामले पर अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार को अपने फैसले का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा।
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